सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय हिंदी में | जीवन परिचय | रचनाएँ

Sumitranandan Pant Ka Jivan Parichay - मित्रों हिंदी साहित्य में कई महान लेखक और कवि हैं जिन्होंने अपने लेखन कविताओं से हमें बहुत कुछ सिखाया है, आज इस लेख के माध्यम से हिंदी साहित्य के कवि सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय हिंदी में पढ़ने वाले हैं। 

हमारी हिन्दी पुस्तकों में इनका महत्वपूर्ण स्थान है, कक्षाओं में इनकी कविता छात्रों को खूब पसन्द आता है, प्रकृति का सुंदर वर्णन इन्हीं की कविताओं में पढ़ने को मिलता है, आइए कविवर सुमित्रा नंदन पंत की जीवनी से अवगत होते हैं।

सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय

सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय हिंदी में | जीवन परिचय | रचनाएँ
सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय


सुमित्रानंदन पंत का जन्म 20 मई 1900 को अल्मोड़ा के कसौनी ग्राम में हुआ था, पंत जी का बचपन का नाम गुसाई दत्त रखा गया था किन्तु उन्हें यह नाम पसंद न था इसलिए स्वयं अपना नाम सुमित्रानंदन पंत रख लिया।

सुमित्रानंदन पंत के जन्म के छह घण्टे बाद ही उनकी माताश्री का देहांत हो गया, उनकी लालन-पालन का जिम्मा उनकी दादी ने उठाया उन्हें बेहतर संस्कार दिए।

प्रारंभिक शिक्षा

उन्होंने 1910 में अपनी मुख्य शिक्षा गवर्नमेंट हाईस्कूल अल्मोड़ा से ही प्राप्त की, जब पंत जी उस विद्यालय में अध्ययनरत थे तब उन्होंने अपना नाम गोसाईं दत्त से सुमित्रानंदन पंत रख लिया। 

हाई स्कूल शिक्षा प्राप्त कर लेने के बाद 1918 में अपने मंझले भाई के साथ काशी चले गए और क्वींस कॉलेज में अध्ययन जारी रखा। वहां से परीक्षा पास कर म्योर कालेज में दाखिला के लिए इलाहाबाद चले गए। 

सन 1919 में महात्मा गांधी की सत्याग्रह आंदोलन से प्रभावित होकर सुमित्रानंदन पंत ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी और अपने घर से ही हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी तथा बांग्ला विषयों का अध्ययन करना शुरू किया। हिंदी साहित्य में उनकी रूचि भरपूर थी फलस्वरूप वे सफल कवि बन कर उभरे।

सुमित्रानंदन पंत की रचनाएँ

सुमित्रानंदन पंत को बचपन से ही प्रकृति से बहुत लगाव था उन्होंने प्रकृति को लेकर कई रचनाएं कई सुंदर कविताएं लिखी जिसे आज के सदी में छात्र पुस्तक में पढ़ा करते हैं। प्रकृति से जुड़ी सुंदर कविताओं का वर्णन करने में उन्हें बहुत आनंद आता था प्रकृति के बारे में कई कृतियां लिखने की वजह से ही उन्हें प्रकृति का सुकुमार कवि कहा जाता है जो प्रकृति में मौजूद वृक्ष, पेड़ - पौधे, लताओं, नदी, चांद इत्यादि को जीवंत रूप प्रदान करते हैं, अपनी कल्पनाओं में प्रकृति प्रदत्त चीजों का अलग ही स्वरूप अपनी कविताओं में बताते हैं जो पाठकों को अत्यंत रोचक प्रतीत होता है।

पंत जी ने अपने जीवन में बहुत से सुंदर कृतियां पर रचनाएं लिखी हैं जी ने पाठकों द्वारा खूब पसंद किया जाता है किंतु सुमित्रानंदन पंत की प्रमुख रचनाएँ कुछ इस प्रकार हैं -

क्रमांक रचनाएँ
1. गुंजन
2. ग्राम्या
3. बूढ़ा चाँद
4. मुक्ति यज्ञ
5. स्वर्णधूलि
6. सत्यकाम
7. स्वर्णकिरण
8. युगांत
9. कला
10. लोकायतन
11. चिदंबरा
12. युगपथ
13. तारापथ
14. स्वर्णकिरण
15. स्वर्ण-धूलि
16. रजत-रश्मि
17. गीतहंस
18. सांध्य वंदना
18. मोह
19. काले बादल
20. अनुभूति
21. अतिमा
21. उत्तरा
22. आजाद
23. चाँदनी
23. पतझड़
24. गीत विहग
25. मधु ज्वाला
26. उच्छावास
27. सत्यकाम
28. मानसी
29. वाणी
30. अतिमा
31. मेघनाथ वध
32. सौवर्ण
33. अवगुंठित
34. ज्योत्सना
35. दो लड़के
36. रजतशिखर
37. शिल्पी
38. लहरों का गीत
39. नौका-विहार
40. चींटी
41. मछुए का गीत
42. तप रे
43. बापू
44. यह धरती कितना देती है
45. चंचल पग दीप-शिखा-से
46. धरती का आँगन इठलाता
47. बाँध दिए क्यों प्राण

दुनिया में जितने भी कवि हैं वे अपने कवितावों, रचनाओं या कृतियों में विभिन्न विषयों पर लेख लिखते हैं, सुमित्रानंदन पंत जिन्होंने अपनी लेख के लिए अधिकतर प्रकृति को ही चुना है नौका - विहार इनकी एक कविता है जो लोगों को प्रेरणा देती है, इस कविता में भी प्रकृति का वर्णन आता है।

विचारधारा

पंत जी ने अपनी रचनाओं में समय के साथ अलग विचारधारा प्रकट की, प्रारंभिक दौर में उन्होंने प्रकृति का सुन्दर वर्णन अपनी ज्यादातर कविताओं में किया बाद में उन्होंने अपनी कविताओं में छायावाद की सूक्ष्म कल्पनाओं को प्रकट किया, अपनी रचनाओं में गहराई से विचारशीलता भरी लेख प्रकशित किया, सुमित्रानंदन पंत की विचारधारा सत्यम शिवम् सुन्दरम से प्रभावित रहा, पंत जी ने मानव कल्याण की भावनाओं को अपनी रचनओं में स्थान दिया, इनकी कविताएँ, कहानियां और उपन्यास लिखने का ढंग वास्तव में प्रसंशनीय है। 

सम्मान एवं पुरस्कार 

हिंदी साहित्य में इतने सुन्दर रचनाओं के लिए सुमित्रा नंदन पन्त को सन 1961 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया, इतना ही नहीं महान पुरस्कारों जैसे ज्ञानपीठ (सन 1968 में), साहित्य अकादमी और सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार से भी इन्हें पुरस्कृत किया जा चुका है, किसी भी रचनात्मक कवि के लिए इतने उच्च श्रेणी का पुरस्कार प्राप्त करना वाकई गर्व की बात है। 

निधन 

28 दिसंबर 1977 को महाकवि सुमित्रानंदन पंत जी का निधन हो गया। 

स्मृति विशेष

पंत जी का जन्म कसौनी गांव में हुआ था उनके जन्म स्थान पर 'सुमित्रा नंदन पंत साहित्यिक वीथिका' नामक संग्रहालय का निर्माण किया गया है, उनकी स्मृति चिन्हों जैसे कलम, चश्मा, कपड़े आदि को वहां सुरक्षित रखा गया है, हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा प्राप्त पुरस्कार का प्रमाण वहां मिलता है। उनकी स्मृति चिन्ह के रूप में उनकी लिखी कवितायेँ एवं रचनाएँ आज भी संग्रहालय में सुरक्षित हैं। सुमित्रानंदन पंत बाल उद्यान नामक पार्क इलाहाबाद में स्थित है, इसे हाथी पार्क के नाम से भी स्थानीय शहरों के लोग जानते हैं। 

FAQs

Q1. युगपथ किसकी रचना है?

Ans: युगपथ सुमित्रानन्दन पंत की रचना है।

Q2. पंत की पहली कविता कौन सी है?

Ans: वीणा, यह इनकी पहली रचना है जिसे 1927 ई. में प्रकाशित किया गया था।

आखरी शब्द 


सुमित्रानंदन पंत जिन्होंने अपनी ज्यादातर कविता प्रकृति पर लिखा, उन्हें प्रकृति के सुकुमार कवि कहा जाता है, मानव कल्याण की भावना से ओतप्रोत पुस्तकों ने लोगों को बहुत कुछ सिखाया, इनकी रचनाएँ हिंदी साहित्य में सदैव अमर रहेंगे, इनकी कविताएं इतनी प्रचलित है की इन्हें हिंदी भारती पुस्तकों में छापा जाता है, विद्यालयों के पुस्तकों छात्र इनके नौका-विहार कविता पढ़ते हैं। 

मित्रों आपको हमारा यह लेख पढ़कर कैसा लगा? अपनी राय कमेंट बॉक्स में बताएं, हमने इस लेख में सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय हिंदी में और उनकी सुन्दर रचनाएँ पढ़ा, यदि आपको इस लेख से सम्बंधित प्रश्न पूछना हो तो कमेंट करें, इस जीवन परिचय को अपने मित्रों के साथ भी साझा करें, धन्यवाद। 

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