My Family Essay In Hindi - मेरा परिवार पर निबंध हिंदी में

दोस्तों आपका स्वागत है हमारे इस ब्लॉग पर जहां पर आप निबंध पढ़ते हैं आज के इस लेख के माध्यम से आप पढ़ने वाले हैं My Family Essay In Hindi (माय फैमिली एस्से इन हिंदी) यानी मेरा परिवार पर निबंध हिंदी में। मुझे उम्मीद है आपको यह निबंध लेखन जरूर पसंद आएगा आप इस लेख के माध्यम से अपने फैमिली एस्से निबंध लेखन को और बेहतर कर पाएंगे इसी उद्देश्य से यह लेख आपके लिए प्रकाशित कर रहा हूं, यदि यह लेख आपको उपयोगी लगे तो इसे अपने अन्य मित्रों के साथ में जरूर शेयर करिएगा ताकि उनकी भी कुछ हेल्प हो सके।

आज के इस My Family Essay In Hindi निबंध से आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा और निबंध लेखन में भी काफी मदद मिलेगी इसमें आपको फैमिली यानी परिवार से संबंधित कई अच्छी बातें बताई गई है जो परिवार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करती है सबसे ज्यादा कोई अपना अगर इस दुनिया में है तो वह अपनी फैमिली ही होती है उसके बाद हमारे दोस्त व बाकी सब आते हैं।

यह लेख मैंने इंटरनेट से अलग-अलग साइटों की मदद अलकर लिखी है जिसमें इस विषय पर एक आदर्श निबंध लिखने में जितने पैराग्राफ प्रयुक्त हो सकते हैं उन्हें लिखने का प्रयास किया है, आशा करता हूं हमारे बाकी लेख की तरह यह निबंध लेख भी आपको जरूर पसंद आएगा, वक्त जाया ना करते हुए आइए इस लेख को प्रारंभ करते हैं।

My Family Essay In Hindi - मेरा परिवार पर निबंध हिंदी में

My Family Essay In Hindi - मेरा परिवार पर निबंध हिंदी में
My Family Essay In Hindi 


एक परिवार जिसमें माता पिता, भाई बहन, बच्चे दादा दादी आदि सदस्य रहती हैं एक ही घर इतने सारे अलग-अलग रिश्ते नाते कोई परिवार कहा जाता है। परिवार जो हर दुख सुख में हमारा साथ देती है मुश्किलों की घड़ी में यही एक अपना होता है जिसे बिन कहे हमारी मदद के लिए हमेशा आगे रहते हैं, परिवार क्या है? परिवार का क्या महत्व है? परिवार किस तरह हमें जोड़े रखता है, हमें क्या सिखाता है? इन सभी प्रश्नों के उत्तर इस निबंध के माध्यम से आपके साथ शेयर कर रहे हैं।

परिचय

एक परिवार जिसमें भाई बहन, माता पिता, दादा दादी, चाचा चाची, मामा मामी जैसे कई रिश्ते नाते होते हैं इन्हीं के समूह को एक शब्द में परिवार कहते हैं। बात करूं मेरे परिवार की तो मेरे परिवार में मेरे माता-पिता, मैं, छोटा भाई, बहन और दादा-दादी है।

व्यक्ति को पहली शिक्षा मिलती है परिवार से

जैसा कि हम सभी को पता है हमें सर्वप्रथम शिक्षा हमारे परिवार से ही मिलती है माता पिता व दादा दादी हमें हाथ पकड़कर चलना सिखाते हैं वही माता-पिता हमें पहली शिक्षा और हमें संस्कार सिखाते हैं क्या सही है क्या गलत है क्या हमें करना चाहिए और क्या नहीं यह सब हमारी मां हमें सिखाती है इंसान में सही देखती तो का निर्माण करने के लिए परिवार की बहुत बड़ी भूमिका होती है। दादा दादी की बात करूं तो वह हमारे सबसे अच्छे दोस्त होती है जो हमें रोज रात को राजा रानी और प्राचीन धार्मिक कहानियां सुनाते हैं जिन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है, शिक्षाप्रद बातें जो कहानियों से मिलती है वह इसीलिए क्योंकि दादा-दादी हमें अच्छी कहानियां सुनाते हैं नहीं तो अभी के समय में देखा जाए तो इनके अलावा किसी के पास वक्त नहीं होता कहानियां सुनाने के लिए हर कोई अपने में व्यस्त रहता है, दूरभाष यंत्र पर तकनीक का विकास होने की वजह से मनोरंजन पर कहानी देखने तथा सुनने का साधन दूरभाष यंत्र में ही मिलने लगा इस वजह से बहुत से लोग उसी में कहानियां सुनते हैं लेकिन मेरी बात माने तो एक बार अपने दादा-दादी या माता-पिता से उनके जमाने के किस्से कहानी सुनाने को कहें सच कहता हूं आप उस दौर में चले जाएंगे जहां कभी हमारे दादा दादी हुआ करते थे इससे हम अपने परिवार से अच्छी तरह वाकिफ हो सकते हैं।

आज के संयुक्त परिवार का छोटा होता स्वरूप की वजह

किसी भी व्यक्ति के लिए उसका परिवार कितना मायने रखता है यह हम सभी को पता है किंतु कभी किस समय में परिवार छोटा होते जा रहा है आज की भागदौड़ भरी जिंदगी की वजह से व्यक्ति बहुत व्यस्त रहने लगा है और अपने परिवार के साथ समय नहीं बिता पा रहा, कई लोग अपने कामकाज के चलते अपने गांव से शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं और वही अपने बच्चे को पढ़ा रहे हैं वही परिवार बसा रहे हैं। परिवार का हर एक सदस्य अलग अलग रहने लगा है यहां तक कि पति-पत्नी भी अपने-अपने काम की सहूलियत के हिसाब से अलग-अलग जगह नौकरी करते हैं और वही निवास करते हैं इसी तरह उनके बच्चे भी पढ़ाई करें किसी अन्य शहर में चले जाते हैं। इस तरह देखा जाए तो इससे संयुक्त परिवार तो छोटा होगा ही, वैसे इसमें दोष किसी का नहीं हमारी जिंदगी है कभी के दौर में ऐसी बन चुकी है की चाहकर भी अपने परिवार के साथ अधिक समय नहीं बिता पाते। सर पर हमेशा काम का बोझ रहता है, घर के खर्चे, स्कूल फीस, बिजली बिल जमा करना, कामकाज पर ध्यान देना इत्यादि। इतनी सारी जिम्मेदारियों के बीच परिवार को समय दे पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

परिवार का महत्व 

एक बच्चे को सर्वप्रथम ज्ञान उसके परिवार वालों से मिलता है वह सभी बातें उसे सिखाई जाती है जो उसके बड़े जानते हैं उस परिवार के सदियों से चली आ रही संस्कृति को सिखाया जाता है इसी वजह से परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी संस्कृति हस्तांतरित होती रहती है। व्यक्ति की पहचान उसके परिवार जाति व कुल से की जाती है, उसके संस्कार रहन-सहन का ढंग देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह किस समाज या जाति का है और उसका किस कुल से संबंध है। हर परिवार की कुछ ना कुछ मान्यताएं होती है जो उनके पूर्वजों द्वारा उत्पन्न है उन्हीं को आगे बरकरार रखते हुए पीढ़ी दर पीढ़ी उन मान्यताओं को अपनाया जाता है।....

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