पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में | Essay on Environmental Pollution in Hindi

नमस्कार मित्रों, इस लेख के माध्यम से आप पढ़ेंगे पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध, यदि आपको निबंध लिखने में मदद चाहिए तो इस लेख को पूरा पढ़िए इससे आपको बहुत कुछ जानने को मिलेगा उसके बाद निबंध लेखन प्रारंभ करें आप बेहतर निबंध लिख पाएंगे, बिना देरी किए आइए प्रारंभ करते हैं –

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में
Essay on Environmental Pollution in Hindi


प्रस्तावना

बढ़ती तकनीकी ने जहां इंसानों का जीवन आसान बना दिया है वहीं पर्यावरण पर इसका बुरा प्रभाव देखने को मिल रहा है जहां पहले घने जंगल, पेड़ पौधे वृक्ष हुआ करते थे वहां बड़ी-बड़ी इमारतों और कारखानों ने अपना जगह बना लिया है पर्यावरण प्रदूषण का कारण फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ होते हैं जो वहां के वातावरण में गंदगी फैलाते हैं।

वृक्ष जीवन की कल्पना के लिए कितना आवश्यक होता है यह सभी को भलीभांति ज्ञात है किंतु अधिकतर लोग वृक्षारोपण की तरफ विचार नहीं करते हैं, जीवन यापन के लिए अनुकूलित वातावरण का होना बहुत आवश्यक होता है यह सभी को पता है, आज से करोड़ों वर्ष पूर्व जब पृथ्वी पर डायनासोर हुआ करत थे वे इसलिए विलुप्त हो गए क्योंकि उनके जीवन के लिए पर्याप्त अनुकूलित वातावरण नहीं था, इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि जीवन के लिए वातावरण का हमारे अनुरूप अनुकूलित रहना कितना आवश्यक होता है इसलिए पर्यावरण को बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी होती है।

जीवन में हमेशा आगे बढ़ना, आवश्यकता अनुसार नई तकनीकी का विकास करना, सुविधा में आवश्यकतानुसार सुधार आदि जरूरी है पर इनके साथ पर्यावरण का ख्याल रखना भी हर इंसान की जिम्मेदारी होती है लेकिन इंसानों ने इन सब पर ध्यान न देकर केवल अपने स्वार्थ के बारे में अधिक सोचा है जिसके वजह से पृथ्वी पर कई आपदा आते रहते हैं, ग्लोबल वार्मिंग की समस्या जिसकी वजह से बड़े - बड़े महानगरों में पानी की समस्या प्रति वर्ष गर्मियों में देखने को मिलते रहते हैं, यदि ध्यान से सोचें कि यह सब क्यों हो रहा है? तो इसमें हम इंसानों की ही गलती है, हमने ही सभी भू - भागों पर प्लास्टिक, कचरा फैलाया हुआ है, ऐसा नहीं है कि पर्यावरण प्रदूषण का कोई समाधान नहीं है, समाधान है और इसके बारे में हर इंसान को अच्छे से पता है पर पर्यावरण स्वच्छता की ओर बहुत कम ही लोग अपना कदम बढ़ाते हैं और बाकी बचे लोग सड़कों तथा गलियों में कचरा फेंकते रहते हैं बिना यह सोचे कि इससे पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचता है।

पर्यावरण यानि हमारे आसपास के पेड़ पौधे, भूमि, जल, हवा आदि, यदि ये सब दूषित हो जाता है तो हमारे आसपास का पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार (Types of Environmental Pollution)

हमारे पर्यावरण में कई तरह के प्रदूषण होते हैं इसलिए पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है जिनमें मुख्य रुप से वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण आदि शामिल होते हैं आइए जानें पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य प्रकार के बारे में –

1. वायु प्रदूषण (Air Pollution)

वायु या हवा के बगैर जीवन की कल्पना करना असंभव है एक व्यक्ति तथा पशु - पक्षी या प्राणी जगत को साँस लेने हेतु हवा की जरूरत होती है बिना वायु के प्राणी एक पल भी जीवित नहीं सकता, पर वायु प्रदूषण की वजह से हवा में जहरीली गैस मिल जाती है जो मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं यही कारण है आजकल व्यक्ति सांस की बीमारी से जूझता है, स्वच्छ वायु न मिलने की वजह से आजकल व्यक्ति को चेहरे पर मास्क लगाकर घूमना पड़ता है क्योंकि हवा जहरीली हो गई है इसके जिम्मेदार वायु प्रदूषण होता है।

2. जल प्रदूषण (Water Pollution)

कहते हैं जल ही जीवन है (water is life) लेकिन जल प्रदूषण से पानी अशुद्ध हो जाता है जिसे पशु पक्षी पीकर बीमार पड़ जाते हैं, प्रदूषित जल पीने से पेट दर्द, पेचिस, पीलिया, गले में परेशानी जैसी समस्याएं देखने को मिलती है। इंसानों द्वारा गंदे पानी को फिल्टर करके उपयोग में लाया जा सकता है लेकिन जानवरों के पास प्रदूषित जल पीने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं होता।

3. मृदा प्रदूषण या भूमि प्रदूषण (Soil Pollution)

भूमि के दूषित होने को मृदा प्रदूषण कहा जाता है, मृदा प्रदूषण से जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है तथा वहां की जमीन में कम उपज होती है। बाजारों में मिलने वाले कीटनाशक का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल से भी भूमि को नुकसान पहुंचता है।

4. ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)

पर्यावरण प्रदूषण के इस प्रकार में ध्वनि से इंसानों तथा वन्य प्राणियों को नुकसान पहुंचाता है, बिना मतलब के अत्यधिक शोर-शराबा को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं, इस तरह के प्रदूषण अक्सर वाहनों के हॉर्न और लाउडस्पीकर की लाउड वॉल्यूम से होती है इससे कानों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

5. रेडियोधर्मी प्रदूषण (Radioactive Pollution) 

रेडियोएक्टिव प्रदूषण की वजह से मनुष्यों, पशु पक्षियों तथा जीव जंतुओं पर बुरा प्रभाव पड़ता है, दरअसल किसी ठोस, द्रव या गैस वाले पदार्थों में अनुपयुक्त रेडियोधर्मी पदार्थों की उपस्थिति से रेडियोधर्मी प्रदूषण होता है।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण (Causes of Environmental Pollution)

1. जनसंख्या वृद्धि (Population Growth)

तेजी से बढ़ती जनसंख्या की वजह से चीजों की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, दुनिया में जितने अधिक लोग होंगे उनके उपयोग के सामान उतने अधिक होंगे, और जैसा कि आपको पता है कि इंसानों की वजह से ही पर्यावरण प्रदूषण की समस्या हुई है अब जितने ज्यादा लोग दुनिया में होंगे उतनी ही अधिक संभावना रहेगी पर्यावरण प्रदूषण फैलने के, इसलिए जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाना अब आवश्यक हो गया है।

2. वाहन (Vehicle) 

विकसित टेक्नोलॉजी ने टू व्हीलर, फोर व्हीलर गाडियां आम लोगों के लिए उपलब्ध करा दी है इससे लोगों को बहुत सुविधा हुई है आने - जाने तथा लंबी यात्रा में लेकिन वाहन भी प्रदूषण का मुख्य कारण बन गया है, जब हम रोड में चलते हैं तो पीछे से बहुत तेज हॉर्न बजाती हुई गाड़ी आती है जो कानों में चुभती है इससे ध्वनि प्रदूषण होता है साथ ही छोटे तथा बड़े गाड़ियों के साइलेंसर से निकलने वाली धुएं से वायु प्रदूषण होता है।

3. बड़े कारखाने (Big Factory)

वनों के किनारे बड़ी बड़ी फैक्ट्री लगाई जाती है और प्रोडक्ट उत्पादन का काम किया जाता है लेकिन पर्यावरण का ख्याल रखते हुए कारखाने से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को वहां की उर्वरा भूमि पर फेंक दिया जाता है और वहां की भूमि प्रदूषित हो जाती है फैक्ट्री में लगी महंगी महंगी मशीनों से निकलने वाली विषैली गैसों से वहां की मृदा, घांस - फूस तथा पेड़ पौधों की पत्तियां काली पड़ जाती है।

फैक्ट्री की चिमनी से निकलने वाली काले धुएं की वजह से वहां की वायु में हानिकारक रासायनिक पदार्थ घुल जाते हैं इसलिए फैक्ट्री के आसपास रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी रोगों से ग्रसित होना पड़ता है तथा वहां के पशु-पक्षी भी बीमार पड़ जाते हैं।

4. वनों की अंधाधुंध कटाई (Indiscriminate Deforestation)

वृक्ष मनुष्यों तथा जंगली जीव जंतुओं के लिए बहुत आवश्यक होता है जंगल में रहने वाले वन्य प्राणियों की वन एकमात्र रहने का विकल्प है किंतु इंसानों ने अपने स्वार्थ के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई करना शुरू कर दिया है, इसलिए जंगल अब पहले से कम घने होने लगे हैं और वन्य प्राणी जैसे हाथी ग्रामीण क्षेत्रों में विचरण करते हैं और फसलों को बर्बाद करते हैं। वनों या पेड़ की कटाई की वजह से पर्यावरण प्रदूषण भी होता है क्योंकि वृक्ष हमें शुद्ध ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है यदि वृक्ष बहुत कम हो जाए तो शुद्ध ऑक्सीजन मिलना मुश्किल हो जाएगा और ऑक्सीजन के अलावा अन्य गैस की मात्रा बढ़ जाएगी और यदि सांस लेते समय सांस के रूप में ऑक्सीजन से अधिक अन्य गैस की अधिकता होगी तो यह मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।

5. प्लास्टिक (Plastic) 

प्लास्टिक या पॉलिथीन के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है क्योंकि प्लास्टिक को उपयोग के बाद नष्ट नहीं किया जा सकता, आपने देखा होगा कि सड़क के किनारे या घरों के आसपास प्लास्टिक के बोतल तथा जंक फूड जैसे प्रोडक्ट के पैकेट ऐसे ही फेंके गए होते हैं जो सड़ते नहीं हैं और कई सालों तक ऐसे ही पड़े रहते हैं इसी की वजह से पर्यावरण दूषित हो जाता है, घरों से निकलने वाले अन्य कूड़ा - कचरा को तो खाद के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है लेकिन प्लास्टिक को नहीं, इसलिए प्लास्टिक के रोकथाम के लिए विचार किए जाते हैं पर इसका कोई प्रभाव देखने को नहीं मिलता लोग अब भी उतना ही प्लास्टिक का उपयोग करते हैं जितना पहले करते थे, घर के लिए जब राशन लाने जाते हैं तो कपड़े से बने थैले के बजाय प्लास्टिक की थैली का उपयोग करते हैं क्योंकि आजकल प्लास्टिक का उपयोग करना फैशन की तरह हो गया है।

पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय (Measures to control environmental pollution)

(1) प्लास्टिक से बनी चीजों का उपयोग करने के बजाय सामान ले जाने के लिए बेहतर विकल्प चुनें।

(2) साफ सफाई का ध्यान रखें, घरों के आसपास कचरा इकट्ठा न करें, कूड़ा - करकट को कूड़ेदान में डालें और पब्लिक प्लेस में गंदगी ना फैलाए, बिस्किट या चॉकलेट के पैकेट को सड़कों में न फेंके।

(3) थोड़ी दूर जाने के लिए वाहन का उपयोग न करें इसके बजाय आपको साइकिल का उपयोग करना चाहिए क्योंकि इसमें ईंधन की आवश्यकता नहीं पड़ती और इससे फिजिकल एक्टिविटी भी होती है।

(4) एकत्रिक हुए कचरे को कूड़ेदान में डालें और उसे खाद बनाने पर विचार करें ताकि उसे दुबारा काम में लिया जा सके।

(5) पर्यावरण नियंत्रण के लिए वनों की कटाई पर रोक लगाना होगा तथा लोगों द्वारा दूसरों को भी वन संरक्षण के लिए प्रोत्साहित करना होगा तथा प्रति वर्ष वृक्षारोपण करना होगा।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध उपसंहार –

पर्यावरण स्वस्थ जीवन यापन के लिए बहुत आवश्यक होता है इसलिए पर्यावरण को बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है, विकसित तकनीक की वजह से लोगों ने भी सभी संसाधनों को अपनाया है लेकिन प्रकृति पर खास ध्यान नहीं दिया, पर्यावरण को इसी तरह बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण पर जोर दिया जाना चाहिए।

इस पोस्ट के माध्यम से आपने पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध पढ़ा, हम उम्मीद करते हैं की आपको यह लेख पसंद आया हो यदि इस लेख से जुड़ी किसी भी प्रकार का प्रश्न पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स के जरिए पूछ सकते हैं।

साथ ही आपसे विनती है की इस पोस्ट को अपने मित्रों के साथ भी जरूर शेयर करें। धन्यवाद!

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